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Saturday, 23 March 2013

अध्यापकों की नियुक्ति की विसंगतियां दूर करे सरकार


ागरण ब्यूरो, इलाहाबाद : हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है कि वह माध्यमिक विद्यालयों में अध्यापकों की नियुक्ति की विसंगतियां दूर करे। कोर्ट ने माध्यमिक शिक्षा के प्रमुख सचिव से कहा है कि वे कठिनाई निवारण आदेश या नियमों में संशोधन करने की कार्यवाही करे ताकि प्रबंधकों को बोर्ड द्वारा चयन होने तक खाली पदों पर तदर्थ नियुक्ति कर छात्रों के शिक्षा की व्यवस्था करने का अधिकार मिल सके। इस मुद्दे पर बैठक बुलाकर ब्योरा 19 अप्रैल को मांगा गया है। यह आदेश न्यायमूर्ति एपी साही ने प्रवीण कुमार शुक्ल की याचिका पर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि कानूनी अड़चनों के चलते माध्यमिक विद्यालयों में मौलिक रिक्त पदों को भरा नहीं जा रहा है। भर्तियों में कठिनाइयां हो रही हैं। रिक्तियों के लिए चयन बोर्ड में भेजने के बाद लंबे समय तक पद भरे नहीं जा रहे हैं जिससे छात्रों को नुकसान हो रहा है। कोर्ट का कहना है कि चयन से पद भरे जाने तक प्रबंध समिति को तदर्थ या अंशकालिक नियुक्ति की छूट देना चाहिए। अभी प्रबंधकों को तदर्थ नियुक्ति का अधिकार नहीं है। अध्यापक की सेवानिवृत्ति के बाद प्रबंध समितियां किसी प्रकार की नियुक्ति नहीं कर पा रही हैं। चयन बोर्ड को अधियाचन भेजे जाने के बाद लंबे समय तक पद भरे नहीं जाते। ऐसे में छात्रों के पठन-पाठन में असुविधा होती है। सरकार को आ रही दिक्कतों को दूर करने के लिए कदम उठाने चाहिए।

पीसीएस प्री परीक्षा के लिए इस बार नेट बैंकिंग


जागरण ब्यूरो, इलाहाबाद : उत्तर प्रदेश पीसीएस प्री की परीक्षा के लिए इस बार नेट बैंकिंग के जरिए भी आवेदन शुल्क जमा किया जा सकेगा। अभ्यर्थियों को होने वाली परेशानियों को देखते हुए उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने पहली बार यह सुविधा प्रदान की है। जिन अभ्यर्थियों को पंजाब नेशनल बैंक एवं स्टेट बैंक आफ इंडिया में नेट बैंकिंग की सुविधा उपलब्ध होगी, वे सहजता से इस बार शुल्क अदा कर सकेंगे। आयोग के अधिकारियों का कहना है कि इससे परीक्षा शुल्क जमा करने के लिए लगने वाली लंबी लाइनों से काफी हद तक निजात मिल सकती है। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा संचालित सम्मिलित राज्य/ प्रवर अधीनस्थ सेवा (सामान्य चयन)-2013 के लिए शनिवार से आवेदन की प्रक्रिया शुरू हो गयी। आवेदन की अंतिम तिथि 20 अप्रैल निर्धारित की गई है। 25 अप्रैल तक आवेदन अस्वीकार किए जाएंगे। परीक्षा के लिए सिर्फ ऑनलाइन आवेदन ही स्वीकार किए जाएंगे। सामान्य चयन के लिए अनुमानित पदों की संख्या 200 तय की गई है हालांकि इसमें बढ़ोतरी होने की संभावना है। विकलांग कोटे में 13 पद रखे गए हैं। उल्लेखनीय है कि पीसीएस प्री परीक्षा 9 जून को होनी है। इस परीक्षा में सफल होने वाले अभ्यर्थी मुख्य परीक्षा में शामिल होंगे। इसके लिए आयोग के निर्देशानुसार पुन: आवेदन करना होगा। मुख्य परीक्षा के बाद साक्षात्कार आयोजित किया जाएगा। --------------- पहले ही दिन चरमराई व्यवस्था पीसीएस प्री परीक्षा के लिए आनलाइन आवेदन के पहले ही दिन व्यवस्था चरमराई रही। आवेदन करने वाले बड़ी मुश्किल से साइट पर फार्म खोल पाए। इसके लिए उन्हें कई-कई बार प्रयास करना पड़ा। परीक्षा नियंत्रक पीएन दुबे के अनुसार पहला दिन होने के कारण छात्रों का लोड साइट पर बढ़ गया जिससे असुविधा हुई। आगे चलकर सिस्टम ठीक-ठाक काम करने लगेगा।

Wednesday, 13 March 2013

क ानून की व्याख्या में उलझी शिक्षकों की भर्ती

क्या सही है और क्या गलत इसका फैसला तो अब हाईकोर्ट की पूर्ण पीठ करेगी लेकिन कानून की अलग-अलग व्याख्या ने शिक्षक भर्ती को उलझा दिया है। इससे नियुक्ति की बाट जोह रहे अभ्यर्थियों को लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। वस्तुत: प्रदेश में प्राथमिक शिक्षकों की भर्ती के लिए टीईटी की अनिवार्यता शुरू से ही विवादों का घर रही है। पहले इसकी परीक्षा को लेकर विवाद और बाद में बीएड अभ्यर्थियों के मामले ने इसे और उलझा दिया। टीईटी की गाइडलाइन पूरे देश के लिए तय की गई थी लेकिन राज्य सरकार ने शिक्षकों की भर्ती में बीएड अभ्यर्थियों के लिए राह खोलकर तमाम विवादों को जन्म दे दिया। बीएड अभ्यर्थियों के अपने तर्क हैं और उनकी एक बड़ी संख्या है इसलिए उन्हें उपेक्षित करना आसान नहीं था। इसी वजह से बड़ी संख्या में याचिकाएं अदालतों में दाखिल हुईं। हाईकोर्ट में मतभिन्नता से अब यह मामला पूर्ण पूठ को संदर्भित हुआ है जिससे एक निश्चित नतीजे पर पहुंचने की उम्मीदें बढ़ गई हैं। वैसे अदालतों की अलग-अलग राय ने एक बहस भी सामने ला दी है कि किसी निश्चित गाइडलाइन को राज्य सरकार क्या तोड़-मरोड़ सकती है? जहां तक टीईटी का सवाल है तो कई राज्यों में ने इसे सफलतापूर्वक अपना लिया है और वहां शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया सही राह पर चल पड़ी है। --------------- विशेष अपील भी खंडपीठ के हवाले टीईटी की अनिवार्यता वाले एक अन्य एकल न्यायपीठ के फैसले के खिलाफ दाखिल विशेष अपील को भी पहले से गठित पूर्ण पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए भेज दिया गया। नवीन श्रीवास्तव व अन्य की विशेष अपील की सुनवाई कर रही इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सुशील हरकौली तथा न्यायमूर्ति मनोज मिश्र की खण्डपीठ ने प्रकरा को पूर्ण पीठ के समक्ष रखने के लिए मुख्य न्यायाधीश को संदर्भित कर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि विशेष अपील का फैसला पूर्ण पीठ के द्वारा होने वाले फैसले से प्रभावित होगा। ऐसे में दोनों मामलों की अलग-अलग सुनवाई किए जाने का औचित्य नहीं है। --------------- टीईटी पास होना अनिवार्य है किंतु शासनादेश के तहत बीएड डिग्रीधारक भी सहायक अध्यापक बन सकते हैं। शर्त यह होगी कि नियुक्ति के बाद उन्हें 6 माह का प्रशिक्षण लेना होगा। -खंडपीठ का आदेश टीईटी पास होना सहायक अध्यापक भर्ती के लिए अनिवार्य है। जब टीईटी अभ्यर्थी नहीं होंगे तब आवश्यक होने पर बीएड की नियुक्ति की जा सकेगी किंतु वे भी बाद में टीईटी पास करेंगे। -न्यायमूर्ति अरुण टंडन टीईटी शिक्षक भर्ती के लिए ग्रीन कार्ड की तरह है। कानूनी उपबंधों की सही व्याख्या किया जाना जरूरी है इसलिए प्रकरण वृहदपीठ को संदर्भित किया जाए। -न्यायमूर्ति एपी साही शिक्षक भर्ती में बीए, बीएससी के साथ बीएड उत्तीर्ण अभ्यर्थियों को शामिल करने के आदेश का अनुपालन किया जाए। एक माह के भीतर इस इस पर कार्यवाही हो। -न्यायमूर्ति डीपी सिंह

मोअल्लिम-ए-उर्दू उपाधिधारकों की राह होगी आसान!

1997 से पहले के मोअल्लिम-ए-उर्दू उपाधिधारकों को अध्यापक पात्रता परीक्षा में विज्ञान और गणित के प्रश्नों से छूट दी जा सकती है। मोअल्लिम-ए-उर्दू उपाधिधारकों को यह राहत देने के लिए परिषदीय स्कूलों में भाषा शिक्षकों की नियुक्ति के लिए अनिवार्य भाषा परीक्षा को समाप्त करने की मंशा है। इसके लिए उप्र बेसिक शिक्षा (अध्यापक) सेवा नियमावली, 1981 की धारा-17 को खत्म करने का प्रस्ताव है। इस प्रस्ताव को कैबिनेट से मंजूर कराने की तैयारी है। 1997 से पहले के मोअल्लिम-ए-उर्दू उपाधिधारक परिषदीय स्कूलों में खुद को उर्दू शिक्षक नियुक्त करने के लिए टीईटी से छूट दिये जाने की मांग कर रहे हैं। केंद्र सरकार द्वारा बनाये गए नियमों के तहत राज्य सरकार के लिए उन्हें टीईटी से छूट दे पाना संभव नहीं है। मोअल्लिम-ए-उर्दू उपाधिधारकों को उर्दू शिक्षक नियुक्त करने का रास्ता निकालने के लिए उन्हें टीईटी में जहां विज्ञान और गणित के प्रश्नों से निजात देने की मंशा है। वहीं उप्र बेसिक शिक्षा (अध्यापक) सेवा नियमावली की धारा-17 को निरस्त करने का भी प्रस्ताव है। धारा-17 के तहत परिषदीय स्कूलों में नियुक्त किये जाने वाले भाषा शिक्षकों के लिए 100 नंबर की भाषा परीक्षा में 50 अंक पाना अनिवार्य है। भाषा परीक्षा में प्राप्त होने वाले अंक चयन के लिए बनायी जाने वाली मेरिट में शामिल किये जाते हैं। बेसिक शिक्षा निदेशालय ने इस संबंध में शासन को प्रस्ताव भेज दिया है।

10,800 पदों पर होगी शिक्षकों की भर्ती

उप्र बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा संचालित प्राथमिक स्कूलों में शिक्षकों के 10,800 रिक्त पदों पर बीटीसी, विशिष्ट बीटीसी और दो वर्षीय बीटीसी उर्दू प्रवीणताधारी प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके अभ्यर्थियों की भर्ती 30 जून तक पूरी की जाएगी। नियुक्ति के लिए अभ्यर्थियों का अध्यापक पात्रता परीक्षा या राष्ट्रीय अध्यापक पात्रता परीक्षा उत्ताीर्ण होना अनिवार्य होगा। शिक्षकों की भर्ती के बारे में मंगलवार को शासनादेश जारी कर दिया गया है। शासनादेश के मुताबिक इन पदों पर नियुक्ति के लिए 15 अप्रैल से पहले विज्ञप्ति प्रकाशित कर दी जाएगी। शिक्षकों की भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन स्वीकार किये जाएंगे। ------------------ कहां कितने पदों पर होगी भर्ती -मेरठ, बागपत, गाजियाबाद, हापुड़, गौतमबुद्ध नगर, लखनऊ, बलरामपुर, कानपुर नगर में से प्रत्येक में 10 -एटा में 30 -मिर्जापुर, सोनभद्र व हमीरपुर में प्रत्येक में 40 -लखीमपुर खीरी-45 -श्रावस्ती, औरैया, जालौन व महोबा में प्रत्येक में 50 -संत रविदास नगर, बांदा व महाराजगंज में प्रत्येक में 60 -चंदौली व महाराजगंज में प्रत्येक में 70 -सिद्धार्थनगर में 80 ़-पीलीभीत व गोंडा में प्रत्येक में 85 -सीतापुर व संत कबीर नगर में प्रत्येक में 90 -कुशीनगर में 95 -मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर, बहराइच, रामपुर, अमरोहा, इटावा व कानपुर देहात में प्रत्येक में 100 -संभल में 105 -शाहजहांपुर व चित्रकूट में प्रत्येक में 110 -कासगंज में 115 -शामली व ललितपुर में प्रत्येक में 120 -फिरोजाबाद व कौशाम्बी में प्रत्येक में 125 -हाथरस में 135 -मथुरा व सहारनपुर में प्रत्येक में 140 -झांसी में 145 -सुल्तानपुर, अमेठी, फर्रुखाबाद, कन्नौज में प्रत्येक में 150 -अंबेडकरनगर में 160 -मैनपुरी व मऊ में प्रत्येक में 180 -वाराणसी में 190 -अलीगढ़ में 195 -गाजीपुर, फतेहपुर, बस्ती में प्रत्येक में 200 -प्रतापगढ़, बदायूं में प्रत्येक में 215 -बाराबंकी में 220 -आगरा, हरदोई में प्रत्येक में 230 -फैजाबाद में 235 -गोरखपुर में 245 -बिजनौर में 250 -बरेली में 275 -देवरिया में 285 -रायबरेली में 290 -उन्नाव में 310 -आजमगढ़ में 330 -बलिया में 350 -इलाहाबाद में 485 -बुलंदशहर में 500 -जौनपुर में 580

Tuesday, 12 March 2013

कोर्ट में जल्द न सुलझा तो संविदा पर करेंगे नियुक्तियां


सरकारी को प्राइवेट स्कूलों के मुकाबिल खड़ा करने की मंशा जाहिर करते हुए बेसिक शिक्षा मंत्री रामगोविंद चौधरी ने सोमवार को विधानसभा में कहा कि हाइकोर्ट में लंबित 72,825 शिक्षकों की भर्ती का मामला अगर जल्द न सुलझा तो सरकार संविदा के आधार पर शिक्षकों की नियुक्ति करेगी। सरकार किसी भी कीमत पर बच्चों की शिक्षा को बाधित नहीं होने देगी। विभाग के बजट पर तीन घंटे की चर्चा में चौधरी ने घोषणा की कि सत्र में पहले ही दिन स्कूल पहुंचते ही विद्यार्थियों को पाठ्य पुस्तकें मिल जाएंगी। 15 अगस्त तक यूनीफार्म भी बांट दी जाएगी। उन्होंने प्राथमिक स्कूलों में अब कक्षा एक से अंग्रेजी और नैतिक शिक्षा की पढ़ाई कराने की भी घोषणा की। शिक्षा मंत्री ने बताया कि शिक्षकों को पढ़ाई के अलावा सिर्फ जनगणना, चुनाव और दैवीय आपदा में ही लगाया जाएगा। विद्यालयों के निर्माण कार्य से शिक्षकों को हटा लिया गया है। शिक्षिकाओं की तैनाती उन स्कूलों में ही होगी जहां आवागमन का साधन होगा। उन्होंने कहा कि शिक्षा मित्रों का पांच हजार रुपये मानदेय बढ़ाने का केंद्र को प्रस्ताव भेजा गया है। अगर अक्षय पात्र संस्था राजी हुई तो उसे प्रदेश के सभी स्कूलों में मध्याह्न भोजन का जिम्मा सौंपा जा सकता है। मंत्री ने दावा किया कि बेसिक शिक्षा विभाग ने एक वर्ष में डेढ़ लाख बेरोजगारों को नौकरी देने का काम किया है। बिना किसी लेन-देन के शिक्षकों का तबादला हुआ। कोशिश इसकी है कि शिक्षा से भ्रष्टाचार का समूल नाश हो। चौधरी ने कहा कि नयी शिक्षा नीति जो भी हो पर उप्र के प्राथमिक विद्यालयों में तिमाही, छमाही और सालाना इम्तिहान होंगे ताकि बच्चों की प्रगति का पता चलता रहे। उन्होंने कहा कि अगर हमें प्राइवेट स्कूलों से मुकाबला करना है तो अप्रैल से ही स्कूल चलो अभियान शुरू करना होगा। बसपा के नीरज मौर्या ने बजट पर कटौती प्रस्ताव के जरिए कहा कि सर्व शिक्षा अभियान का पैसा ठेकेदारों के ही पेट भरने के काम आया। भाजपा के डा. राधा मोहनदास अग्रवाल ने कहा कि हम लोगों ने शिक्षकों को रसोइया बना दिया है, शिक्षा से उनका कोई मतलब नहीं रह गया है। मिड डे मील से बच्चों का भले ही पोषण न हुआ हो, पर उनकी पढ़ाई जरूर चौपट हो गयी है। भाजपा सदस्य सीमा द्विवेदी के जौनपुर जिले के तमाम स्कूलों के बंद होने की जानकारी देने पर शिक्षा मंत्री ने कहा कि आप किस बात की जनप्रतिनिधि हैं जो उन्हें खुलवा नहीं सकीं। मंत्री मनोज पांडेय के अलावा सदस्य रूबी प्रसाद, रामलाल अकेला, कालीचरण, शिवाकांत ओझा, सीमा द्विवेदी आदि ने भी बजट चर्चा में भाग लिया। बाद में ध्वनिमत से बजट पारित हो गया।

Monday, 11 March 2013

हड़ताल पर रहेंगे प्रदेश के अधिववक्ता

चंडीगढ़ तथा जयपुर में अधिवक्ताओं पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में प्रदेश के अधिवक्ता 11 मार्च को कार्य से विरत रहेंगे। इस दौरान सूबे में किसी भी अदालत में कार्य नहीं होगा। यूपी बार कौंसिल ने इसके लिए सभी जिलों के अधिवक्ता संगठनों को पत्र प्रेषित किया है। कौंसिल के अध्यक्ष इमरान माबूद खान ने बताया कि कार्य बहिष्कार का यह फैसला बार कौंसिल आफ इंडिया के आह्वान पर लिया गया है। उन्होंने बताया कि इस दौरान सभी अधिवक्ता संगठन अपने अपने जिलों में सभी व विरोध प्रदर्शन करके इस तरह की घटनाओं के प्रति आक्रोश जाहिर करेंगे। उन्होंने बताया कि प्रदेश में अधिवक्ताओं की संख्या तीन लाख 15 हजार है। 11 मार्च को सभी कार्य बहिष्कार करेंगे।

Monday, 4 March 2013

गुरुजनों की राह तक रही उच्च शिक्षा


सूबे की उच्च शिक्षा व्यवस्था पर हाई कोर्ट की तल्ख टिप्पणी अकारण नहीं है। शिक्षा का केंद्र बिंदु शिक्षक होता है लेकिन प्रदेश में उच्च शिक्षा अरसे से गुरुजनों की राह तक रही है। सूबे के राज्य विश्वविद्यालयों में शिक्षकों के 30 प्रतिशत, राजकीय महाविद्यालयों में 35 फीसदी और अशासकीय सहायताप्राप्त कॉलेजों में 31 प्रतिशत पद खाली हैं। राज्य विश्वविद्यालयों मे शिक्षकों के 1163 सृजित पदों में से 500 से ज्यादा रिक्त हैं। आगरा के डॉ.भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय में शिक्षकों के 46 प्रतिशत पदों को नियुक्तियों का इंतजार है। यहां प्रोफेसर के आधे से अधिक और रीडर के करीब तीन-चौथाई पद खाली हैं। लेक्चरर के एक-तिहाई से अधिक पद रिक्त हैं। मेरठ के चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में शिक्षकों के 38 फीसदी पद रिक्त हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय में शिक्षकों के 26 फीसदी पद रिक्त हैं। यहां प्रोफेसर के 50 प्रतिशत से अधिक, रीडर के 29 प्रतिशत और लेक्चरर के 21 प्रतिशत पद खाली हैं। पं.दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में भी शिक्षकों की कमी का रोना है। यहां शिक्षकों के लगभग 40 प्रतिशत पद रिक्त हैं। विश्वविद्यालय में प्रोफेसर के तीन-चौथाई, रीडर के लगभग एक-तिहाई और लेक्चरर के 36 फीसदी पद खाली हैं। वहीं वाराणसी के संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में अध्यापकों के 40 फीसदी पद खाली हैं। अन्य राज्य विश्वविद्यालयों में भी शिक्षकों के कई पद रिक्त हैं। सरकार राजकीय महाविद्यालयों की स्थापना तो कर रही है लेकिन उनमें समुचित संख्या में गुरुजन की नियुक्ति नहीं हो पा रही है। राजकीय कॉलेजों में शिक्षकों के 2156 पदों में से 756 पद खाली हैं। यह स्थिति तब है जब राजकीय महाविद्यालयों में संविदा पर तैनात लगभग 350 शिक्षक भी विद्यादान में हाथ बंटा रहे हैं। अनुदानित कॉलेजों का हाल भी बुरा है। इनमें शिक्षकों के 11273 पद सृजित हैं जिनमें से तकरीबन 3500 रिक्त हैं। राज्य विश्वविद्यालय अपने स्तर से शिक्षकों का चयन करते हैं। वहीं राजकीय महाविद्यालयों में शिक्षकों के चयन के लिए सरकार लोक सेवा आयोग को अधियाचन भेजती है। अशासकीय सहायताप्राप्त कॉलेजों में शिक्षकों की नियुक्ति उच्चतर शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा किये गए चयन के माध्यम से होती है।

निजी बीटीसी कॉलेजों में प्रवेश के लिए काउन्सिलिंग 13 से

लखनऊ : राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) से मान्यताप्राप्त और राज्य सरकार से संबद्धताप्राप्त निजी संस्थानों को बीटीसी सत्र 2012-13 में प्रशिक्षणार्थी आवंटित करने के लिए 13,14 व 15 मार्च को जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (डायट) में काउन्सिलिंग होगी। काउन्सिलिंग के उपरांत चयनित अभ्यर्थियों की सूची 17 मार्च को वेबसाइट पर जारी कर दी जाएगी। इस संबंध में राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) के निदेशक सर्वेंद्र विक्रम बहादुर सिंह ने सभी डायट प्राचार्यों को निर्देश जारी कर दिया है। विशेष आरक्षण के सभी श्रेणियों के अभ्यर्थियों की काउन्सिलिंग 13 मार्च को होगी। महिला कला व महिला विज्ञान वर्ग के अभ्यर्थियों की काउन्सिलिंग 14 तथा पुरुष कला व पुरुष विज्ञान वर्ग के अभ्यर्थियों की 15 मार्च को होगी। काउन्सिलिंग के लिए श्रेणीवार कट ऑफ मेरिट की विज्ञप्ति छह मार्च को प्रकाशित की जाएगी। काउन्सिलिंग के समय अभ्यर्थियों से जिले की निजी बीटीसी संस्थाओं के लिए निर्धारित प्रारूप पर वरीयता प्राप्त की जाएगी जिस पर मेरिट के आधार पर निर्णय लिया जाएगा। फ्री और पेड सीट के लिए अभ्यर्थियों से अलग-अलग वरीयता ली जाएगी। चयन सूची में शामिल अभ्यर्थियों को मूल अभिलेखों की जांच के लिए जिला स्तरीय चयन समिति द्वारा निर्धारित तिथि को बुलाया जाएगा। चयन की कार्यवाही को हर हाल में 31 मार्च तक पूरा करने का निर्देश दिया गया है। -------------------