Thursday, 28 February 2013
दारोगा बनने की दौड़ होगी कम
कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश उप निरीक्षक और निरीक्षक (नागरिक पुलिस) सेवा नियमावली 2008 में पंचम संशोधन को मंजूरी दे दी है। उप निरीक्षक की शारीरिक योग्यता परीक्षा में एक घंटे में दस किलोमीटर की दौड़ की जगह 4.8 किलोमीटर की दौड़ सिर्फ 35 मिनट में पूरी करनी होगी, वहीं उप निरीक्षक से निरीक्षक पद पर पचास प्रतिशत ज्येष्ठता और पचास प्रतिशत लिखित परीक्षा के आधार पर प्रोन्नति होगी। परीक्षा पाठ्यक्रम भी बदला गया है। पहले अभ्यर्थी को 60 मिनट में दस किलोमीटर की दौड़ लगानी होती थी।
पिछले दिनों शारीरिक भर्ती परीक्षा के दौरान कई लोग गंभीर रूप से बीमार हो गये थे और एक अभ्यर्थी की मौत हो गयी, इस वजह से यह बदलाव किया गया है।
चयन बोर्ड के ढांचे में होगा बदलाव
-टीजीटी व पीजीटी की लंबित परीक्षाओं के आयोजन पर फैसला नही
जागरण ब्यूरो, इलाहाबाद :
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड बोर्ड आने वाले दिनों में पूरी तरह से कंप्यूट्रीकृत हो जाएगा। बोर्ड के ढांचे में बदलाव होगा। बुधवार को चयन बोर्ड की बोर्ड बैठक में इस पर सहमति बनी। बैठक में लंबित परीक्षाओं के आयोजन को लेकर कोई बड़ा फैसला तो नहीं किया गया पर इसे लेकर नए सिरे से कवायद शुरू करने पर जोर दिया गया।
बैठक के आरंभ में बोर्ड अध्यक्ष प्रो.देवकीनंदन शर्मा ने कहा कि बोर्ड की छवि सुधारने को लेकर सरकार चिंतित है लिहाजा इस दिशा में बहुत काम किए जाने की जरुरत है। तय किया गया कि आने वाले दिनों में बोर्ड को पूरी तरह से कंप्यूट्रीकृत कर दिया जाए इससे काम में तेजी के साथ पारदर्शिता आएगी। अध्यक्ष ने संबंधित अधिकारियों को इस संबंध में कार्रवाई तेज करने के निर्देश दिए। बैठक में बोर्ड के वर्तमान ढांचे की समीक्षा की गई। संबंधित अधिकारियों से बातचीत के बाद ढांचे को मानक के अनुरूप किए जाने पर सहमति बनी। बैठक में प्रशिक्षित स्नातक व प्रवक्ता (पीजीटी) की लंबित परीक्षाओं के आयोजन के संबंध में विचार विमर्श किया गया लेकिन कोई बड़ा निर्णय नहीं किया जा सका। अध्यक्ष ने कहा कि ढांचा दुरुस्त किए जाने के बाद इस पर कोई भी निर्णय लिया जाना उचित होगा। लेकिन इसके लिए विभागीय कवायद जारी रहनी चाहिए। अध्यक्ष ने पिछली बोर्ड बैठक में किए गए निर्णयों की समीक्षा भी की।
17 अति पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति की सुविधाएं
लखनऊ [जागरण ब्यूरो]। अब यूपी में 17 अति पिछड़ी जातियों को एक बार फिर अनुसूचित जाति के समान सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। ये जातियां हैं- कहार, कश्यप, केवट, मल्लाह, निषाद, कुम्हार, प्रजापति, धीवर, बिन्द, भर, राजभर, धींमर, बाथम, तुरहा, गौड़, मांझी और मछुआ। गुरुवार को राज्य मंत्रिपरिषद की हुई बैठक में इस प्रस्ताव का मंजूरी दी गई। इससे पहले वर्ष 2005 में मुलायम सरकार में भी इन अति पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति के समान सुविधाएं दी गई थी, पर वर्ष मायावती ने सत्ता में आने पर 2007 में इस व्यवस्था को समाप्त कर दिया था।
सहायक अध्यापक भर्ती मामले में सुनवाई चार को
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश में 72825 प्रशिक्षु सहायक अध्यापकों की भर्ती प्रक्रिया पर लगी रोक को बढ़ाते हुए अगली सुनवाई चार मार्च को नियत की है। बुधवार को कोर्ट में राज्य सरकार द्वारा दाखिल जवाब पर अपीलार्थी को प्रति शपथपत्र दाखिल करने को कहा है। यह आदेश न्यायमूर्ति सुशील हरकौली व न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की खण्डपीठ ने दिया है।
मालूम हो कि टीईटी परिणाम को मेरिट को सहायक अध्यापक भर्ती में अर्हता मानने की मांग को लेकर विशेष अपील दाखिल की गयी है। स्पेशल अपील में एकल न्यायाधीश के 16 जनवरी 2013 के आदेश को चुनौती दी गयी है। न्यायालय ने पूर्व में भर्ती प्रक्रिया पर लगी रोक जारी रहने का निर्देश दिया है।
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